हरियाणा में जन्मे और राजस्थान में जयपुर को कर्मभूमि बनाए, किसान वैज्ञानिक रायसिंह दहिया अनपढ़ होते हुए भी पोर्टेबल बायोमास गैसीफायर विकसित करने के कारण, 2015 में दो सप्ताह राष्ट्रपति भवन में मेहमान रहे। उनकी कहानी, उनकी जुबानी।
हरियाणा के पीली मन्दोरी में, साधारण से किसान रणजीतराम के यहां 27 जनवरी, 1963 को मेरा जन्म हुआ। वहां की जमीन बेचकर, दादाजी जोधाराम ने, राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले की नोहर तहसील के थालड़का गांव में जमीन खरीद ली। मैं 18 दिन का था तब पिताजी भी वहां सपरिवार आ गए। अर्थसंकट के कारण स्कूल नहीं जा सका। छोटे भाई रामेश्वर ने साक्षर बनाया। कुल नौ भाई बहन। दो भाई खेत में काम करते, दो पढ़ने जाते। छुटपन से मवेशी चराता। खेत में औजार उठाते हुए 13-14 साल की उम्र में औजार बनाने लगा। छेनी, हथोड़ा और लोहा तपाने का पंखा खुद ही बनाया। लोहे के बन्दूक-पिस्तौल भी बनाए। घड़ी, रेडियो और सिलाई मशीन ठीक करना सीख गया।
17 साल की उम्र में विद्या से शादी हुई। पत्नी और परिवार के साथ मिलकर 82-83 में ईंटें बनाने के लिए भट्ठी बनाई। उसमें करीब 18 घंटे कपास और सरसों के कचरे को झोंकते। दो साल में तीन लाख ईंटें बनाई। 1990 में थालड़का में दहिया ट्रैक्टर वर्कशॉप बनाया। इंजन की भाषा सीख गया। 1987 में अकाल के कारण बोरवेल का काम सीख कर, उन्हें बनाने में जुट गया।
पोर्टेबल बायोमास गैसीफायर
हमने देखा कि ईंटों की भट्ठी में कचरे और लकड़ी के जलने से गैस निकल रही है जो लौ को तेज कर रही है। 1999-2000 में विचार आया कि इस गैस को अलग कर लिया जाए तो इंजन चलाया जा सकता है। 8 एचपी सिंगल सिलेंडर इंजन को खेती के लिए लगातार गैस चाहिए। इसके लिए गैसीफायर और फिल्टरिंग सिस्टम बनाया। 2001 में इसे खेत में उपयोग में लिया। सुधार कर सीमेंट फिल्टरेशन बनाया। वर्तमान में पोर्टेबल बायोमास गैसीफायर साउंड प्रूफ और स्वचालित है। टायर लगे होने के कारण इसे कहीं भी आसानी से ले जा सकते हैं। 2003 में अपने खेत सहित तीन जगह इसे लगाया। इसमें अभी तक निरन्तर सुधार कर रहा हूं।
देश-विदेश में इसकी मांग इतनी बढ़ी कि हनुमानगढ़ से जयपुर को कर्मभूमि बनाकर, एयरसोल बायोपावर की शुरुआत की। पत्नी, बेटियों नीरू और डॉ. राज एवं बेटे जय के निरन्तर साथ ने, देश में आम किसान से प्रतिष्ठित संस्थाओं और अमेरिका, द. अफ्रीका, जर्मनी आदि कई देशों तक इसे पहुंचाया। अभी तक दो सौ बायोमास गैसीफायर बेच चुका हूं।
बचना है पर्यावरण प्रदूषण से
कहा जाता है पोल्यूशन का सोल्यूशन संभव नहीं। मेरा मानना है कि ठान लें तो किसी भी कठिनाई का सोल्यूशन है। इन दिनों पराली के जलाने से पर्यावरण को हो रहे भारी नुकसान से सारा देश परेशान है। मेरे द्वारा बनाए गैसीफायर में पराली का ईंधन के रूप में उपयोग किया जाने लगा है। भट्ठियां एलपीजी से न चलाकर, गैसीफायर से चलानी चाहिए। ग्वारगम की प्रक्रिया में हवा गरम करने, थर्मल और विद्युत के लिए गैसीफायर अपनाया जाना चाहिए। उत्तराखण्ड के जंगल में आग की समस्या पर नियंत्रण के लिए मेरे 8 गैसीफायर मंगवाए गए। नवाचारी किसान भाइयों से कहना चाहता हूं कि सिफर से सैकड़े तक का सफर कठिन है, असंभव नहीं।
राष्ट्रपति भवन में मेहमान
बायोमास गैसीफायर के लिए, मेरे जैसे अनपढ़ किसान को, 2015 में 7 से 20 मार्च तक राष्ट्रपति भवन में मेहमान बनाया गया। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, मंत्रियों, वैज्ञानिकों और अधिकारियों से मिलने का मौका मिला।
सम्मान
• 2002 में थालड़का ग्राम पंचायत ने पहली बार सम्मानित किया। 2006 में ‘इफको’ ने सम्मान स्वरूप एक लाख रुपये प्रदान किए। 2009 में एनआईएफ का राष्ट्रीय सम्मान राष्ट्रपति भवन में मिला। ‘खेतों के वैज्ञानिक’ सम्मान 2011 में ‘सिटा’ ने जयपुर में, 2017 में राजुवास ने बीकानेर में, 2018 में पेसिफिक यूनिवर्सिटी और भाकिसं ने उदयपुर में एवं 2019 में मोरक्को और भारतीय संस्था ने प्रदान किए। 2018 में ‘पैडमैन’ फिल्म के प्रमोशन कार्यक्रम में अक्षयकुमार ने पांच लाख रुपये की सम्मान राशि प्रदान की।
सम्पर्क कर सकते हैं
एनरसोल बायोपावर प्रा.लि., प्लाट नं. 1, केलाश कैंटीन, जेसल्या के पास, रोड 17, विश्वकर्मा इंडस्ट्रियल एरिया, जयपुर-302013 (राजस्थान),
वेबसाइट : www.enersolbiopower.com
ईमेल : raj@enersolbiopower.com
मोबाइल : 9460188117